बुधवार, 22 जुलाई 2015

वर्ण पिरामिड / varn piramid (जसाला पिरामिड / jasala piramid )

((((((****यह मेरी नवविधा है - ''वर्ण पिरामिड''****))))) 
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[इसमे प्रथम पंक्ति में -एक ; द्वितीय में -दो ; तृतीया में- तीन ; चतुर्थ में -चार; पंचम में -पांच; षष्ठम में- छः; और सप्तम में -सात वर्ण है,,, इसमें केवल पूर्ण वर्ण गिने जाते हैं ,,,,मात्राएँ या अर्द्ध -वर्ण नहीं गिने जाते ,,,यह केवल सात पंक्तियों की ही रचना है इसीलिए सूक्ष्म में अधिकतम कहना होता है ,,किन्ही दो पंक्तियों में तुकांत मिल जाये तो रचना में सौंदर्य आ जाता है ] जैसे-
ये
वर्षा
कनक-
झरें बूंदें,
उड़े विहग ,
तरुवर सूने ,
आनंद कंद फूले । [१]
थे
वट
पीपल ,
आम,नीम,
कुँए के पास ,
झूलों की मस्ती में -
खिले मन उदास।  [२]


हे
प्रभु
शंकर !
बेल-पत्र -
करूँ अर्पण ,
हो व्याधि निदान ,
कष्टों का समाधान । [३]

तू
मेरा,
में तेरा,
जीव-जीव
कण -कण का
तू ही आधार है ,
प्रभु  निर्विकार है। [४]
 ********सुरेशपाल वर्मा जसाला [दिल्ली]

2 टिप्‍पणियां:

  1. सात पंक्तियाँ ही क्यों हो ?
    मुझे ये लेखन विधा बहुत पसन्द आई
    आभारी हूँ
    आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शनिवार 26 सितम्बर 2015 को लिंक की जाएगी ....
    http://halchalwith5links.blogspot.in 
    पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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    उत्तर
    1. 10 अक्टूबर को लिंक की जायेगी
      हड़बड़ी में गड़बड़ी हो गई है
      क्षमा करें

      हटाएं